हिंदू रीति रिवाज और पौराणिक परंपराओं के अनुसार व्रत करना काफी समय से प्रचलित है परंतु क्या हमारे शास्त्र और ग्रंथों के अनुसार व्रत करने को भगवान द्वारा सही ठहराया गया है। या फिर ग्रंथों में कुछ और लिखा है। इसी तथ्य पर विस्तृत रूप से इस ब्लॉग के माध्यम से हम जानेंगे।
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| शिव तांडव स्त्रोत |
हर साल कई प्रकार के व्रत आते हैं जैसे करवा चौथ, महाशिवरात्रि, लक्ष्मी पूजन इसके अलावा बुधवार का व्रत, सोमवार का व्रत, ग्यारस का व्रत ऐसे कई प्रकार के व्रत हिंदू लोग हर साल रखते हैं। पूरा दिन अन्य को मुख से नहीं लगाते परंतु क्या वे भगवान को प्रसन्न कर पाते हैं या सुखी हो पाते हैं।
आइए देखते हैं हमारे पवित्र शास्त्र श्रीमद्भगवद्गीता में व्रत के लिए क्या कहा गया है।
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| read bhagwat geeta in hindi |
गीता अध्याय 6 श्लोक 16 में गीता ज्ञान दाता अर्जुन से कह रहे हैं कि न तो यह भक्ति अधिक खाने वाले की और ना ही कम खाने वाले की सफल होगी। और न हीं कम सोने वाले की और नहीं ज्यादा सोने वाले की..!!
अर्थात हठयोग करने वाले से परमात्मा सदैव दूर हैं।
अब यहां पर जानने लायक विषय यह है कि जो लोग महाशिवरात्रि का व्रत करते हैं वह तो एक हठयोग की संज्ञा में आता है तो क्या फिर परमात्मा हम से प्रसन्न होंगे यहां हम हमारे ग्रंथों के विरुद्ध भक्ति कर रहे हैं जो हमारे लिए लाभदायक नहीं है।
अब यहां पर जानना है कि ब्रह्मा विष्णु महेश क्या यह तीनों परमात्मा है...!!
दरअसल ऐसा नहीं है वास्तविक पूर्ण परमात्मा कबीर देव हैं। जो इन तीनों से अन्य हैं। इन तीनों के पिता काल निरंजन तथा इनकी माता दुर्गा है। काल निरंजन ने ही संपूर्ण गीता का ज्ञान दिया था। जैसा कि गीता अध्याय 11 श्लोक 32 में उन्होंने अपना परिचय भी दिया है।
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| शिव तांडव स्त्रोत से लाभ |
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| SHIV TANDAV |
भगवान शिव संघार क्यों करते हैं इसका मुख्यय कारण है कि शिव जी के पिता काल निरंजन ने उन्हें संघार के लिए कार्य दे रखा है। भगवान विष्णु को पालनकर्ता का , तथा ब्रह्मा जी को उत्पत्ति का कार्य दे रखा है।
और इसी प्रकार विधिवत रूप से यह सृष्टि चल रही है। परंतु इस काल के भयंकर जाल में हम सभी जीव उलझाए हुए हैं। अब यहां से निकलने का एकमात्र मार्ग जो गीता अध्याय 15 श्लोक 1 से 4 में बताया गया है कि उस तत्वदर्शी संत की खोज कर जो तुम्हें वास्तविक मोक्ष का मार्ग बताएंगे। और उसे जानने के लिए आज पूरे विश्व में एकमात्र तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज ही है। अवश्य उनके मंगल प्रवचन हमें सुनकर पूर्ण मोक्ष का सही मार्ग पकड़ना चाहिए।
संत रामपाल जी महाराज के मंगल प्रवचन सुनने के लिए अवश्य देखे साधना टीवी शाम 7:30 से 8:30 तक।
वास्तव में हमारे वेद शास्त्रों के अनुसार हमें भक्ति करनी चाहिए तथा व्रत करने से हमें कोई लाभ नहीं है और यह तो हमारे भगवान जैसा कि गीता में मना कर रहे हैं तो फिर हम क्यों शास्त्र विरुद्ध साधना करके हमारे जीवन को और कठिन बनाएं।



