Importance Of Spiritual Knowledge

Wednesday, August 5, 2020

कबीर साहिब की जीवनी

कबीर शब्द का अर्थ होता है "महान" ।  कबीर साहेब 15 वीं सदी के एक महान कवि थे। अपने समय में एक विख्यात समाज सुधारक की भूमिका निभा रहे थे। वास्तव में लोग कबीर साहिब के बारे में क्या धारणाएं रखते हैं? तथा स्वयं कबीर साहेब ने अपने बारे में क्या परिचय दिया है? इन दोनों ही तथ्यों पर विस्तार पूर्वक इस लेख के माध्यम से जानेंगे.....!!!

 कबीर साहेब का प्राकट्य सन 1398 को लहरतारा तालाब पर एक
 कमल के फूल पर प्रकट हुए थे। कबीर साहेब को निसंतान मुस्लिम दंपति नीरू और नीमा ने जो वहां सुबह सुबह स्नान करने आए थे। उन्हें वहां लहरतारा तालाब में कमल के फूल पर देखकर उन्हें
 वहां से उठा ले गए थे।  और कबीर का पालन पोषण करने वाले मुंह बोले माता पिता नीरू और नीमा बने। वास्तव में लोगों में यह धारणा है कि कबीर साहिब का जन्म किसी विधवा ब्राह्मणी के कोख से हुआ था । बल्कि ऐसा नहीं है..!  कबीर साहेब अपनी वाणी में स्वयं 
बताते हैं कि....

ना मेरा जन्म ना गर्भ बसेरा। बालक बन दिखलाया।।
 काशीनगर जल कमल पर डेरा, तहां जुलाहे ने पाया।।

इसका अर्थ यही है कि परमेश्वर कबीर साहेब का जन्म किसी भी विधवा ब्राह्मणी की कोख से नहीं हुआ। वे स्वयं प्रकट हुए थे। और उनका पालन पोषण नीरू और नीमा नाम के दो जुलाहे निसंतान दंपत्ति ने किया था। 

कबीर के दोहे


वास्तव में कबीर साहिब स्वयं परमात्मा थे। जो इस धरती पर स्वयं प्रकट होकर अपने वास्तविक ज्ञान से समस्त विश्व को अवगत करा कर वास्तविक मोक्ष का मार्ग बताने आए थे। उन्होंने यह कार्य बखूबी एक कवि की भूमिका निभाते हुए पूर्ण किया। इसका प्रमाण वेदो में भी मिलता है कि पूर्ण परमात्मा अपनी महिमा बताने के लिए स्वयं धरती पर आता है।  एक कवि की भूमिका निभाता है।  और पूर्ण परमेश्वर कबीर साहिब के अतिरिक्त ऐसा करने वाले इस धरा पर आज तक कोई नहीं हुआ। इससे यह सिद्ध है कि पूर्ण परमात्मा कबीर साहिब हैं।






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