Importance Of Spiritual Knowledge

Wednesday, August 5, 2020

कबीर साहिब की जीवनी

कबीर शब्द का अर्थ होता है "महान" ।  कबीर साहेब 15 वीं सदी के एक महान कवि थे। अपने समय में एक विख्यात समाज सुधारक की भूमिका निभा रहे थे। वास्तव में लोग कबीर साहिब के बारे में क्या धारणाएं रखते हैं? तथा स्वयं कबीर साहेब ने अपने बारे में क्या परिचय दिया है? इन दोनों ही तथ्यों पर विस्तार पूर्वक इस लेख के माध्यम से जानेंगे.....!!!

 कबीर साहेब का प्राकट्य सन 1398 को लहरतारा तालाब पर एक
 कमल के फूल पर प्रकट हुए थे। कबीर साहेब को निसंतान मुस्लिम दंपति नीरू और नीमा ने जो वहां सुबह सुबह स्नान करने आए थे। उन्हें वहां लहरतारा तालाब में कमल के फूल पर देखकर उन्हें
 वहां से उठा ले गए थे।  और कबीर का पालन पोषण करने वाले मुंह बोले माता पिता नीरू और नीमा बने। वास्तव में लोगों में यह धारणा है कि कबीर साहिब का जन्म किसी विधवा ब्राह्मणी के कोख से हुआ था । बल्कि ऐसा नहीं है..!  कबीर साहेब अपनी वाणी में स्वयं 
बताते हैं कि....

ना मेरा जन्म ना गर्भ बसेरा। बालक बन दिखलाया।।
 काशीनगर जल कमल पर डेरा, तहां जुलाहे ने पाया।।

इसका अर्थ यही है कि परमेश्वर कबीर साहेब का जन्म किसी भी विधवा ब्राह्मणी की कोख से नहीं हुआ। वे स्वयं प्रकट हुए थे। और उनका पालन पोषण नीरू और नीमा नाम के दो जुलाहे निसंतान दंपत्ति ने किया था। 

कबीर के दोहे


वास्तव में कबीर साहिब स्वयं परमात्मा थे। जो इस धरती पर स्वयं प्रकट होकर अपने वास्तविक ज्ञान से समस्त विश्व को अवगत करा कर वास्तविक मोक्ष का मार्ग बताने आए थे। उन्होंने यह कार्य बखूबी एक कवि की भूमिका निभाते हुए पूर्ण किया। इसका प्रमाण वेदो में भी मिलता है कि पूर्ण परमात्मा अपनी महिमा बताने के लिए स्वयं धरती पर आता है।  एक कवि की भूमिका निभाता है।  और पूर्ण परमेश्वर कबीर साहिब के अतिरिक्त ऐसा करने वाले इस धरा पर आज तक कोई नहीं हुआ। इससे यह सिद्ध है कि पूर्ण परमात्मा कबीर साहिब हैं।






Wednesday, July 15, 2020

शिवरात्रि का व्रत करने से लाभ ?


हिंदू रीति रिवाज और पौराणिक परंपराओं के अनुसार व्रत करना काफी समय से प्रचलित है परंतु क्या हमारे शास्त्र और ग्रंथों के अनुसार व्रत करने को भगवान द्वारा सही ठहराया गया है। या फिर ग्रंथों में कुछ और लिखा है। इसी तथ्य पर विस्तृत रूप से इस ब्लॉग के माध्यम से हम जानेंगे।

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हर साल कई प्रकार के व्रत आते हैं जैसे करवा चौथ, महाशिवरात्रि, लक्ष्मी पूजन इसके अलावा बुधवार का व्रत, सोमवार का व्रत, ग्यारस का व्रत  ऐसे कई प्रकार के व्रत हिंदू लोग हर साल रखते हैं। पूरा दिन अन्य को मुख से नहीं लगाते परंतु क्या वे भगवान को प्रसन्न कर पाते हैं या सुखी हो पाते हैं।

आइए देखते हैं हमारे पवित्र शास्त्र श्रीमद्भगवद्गीता में व्रत के लिए क्या कहा गया है।

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 गीता अध्याय 6 श्लोक 16 में गीता ज्ञान दाता अर्जुन से कह रहे हैं कि न तो यह भक्ति अधिक खाने वाले की और ना ही कम खाने वाले की सफल होगी। और न हीं कम सोने वाले की और नहीं ज्यादा सोने वाले की..!!
अर्थात हठयोग करने वाले से परमात्मा सदैव दूर हैं।

अब यहां पर जानने लायक विषय यह है कि जो लोग महाशिवरात्रि का व्रत करते हैं वह तो एक हठयोग की संज्ञा में आता है तो क्या फिर परमात्मा हम से प्रसन्न होंगे यहां हम हमारे ग्रंथों के विरुद्ध भक्ति कर रहे हैं जो हमारे लिए लाभदायक नहीं है।

अब यहां पर जानना है कि ब्रह्मा विष्णु महेश क्या यह तीनों परमात्मा है...!!

 दरअसल ऐसा नहीं है वास्तविक पूर्ण परमात्मा कबीर देव हैं। जो इन तीनों से अन्य हैं। इन तीनों के पिता काल निरंजन तथा इनकी माता दुर्गा है। काल निरंजन ने ही संपूर्ण गीता का ज्ञान दिया था। जैसा कि गीता अध्याय 11 श्लोक 32 में उन्होंने अपना परिचय भी दिया है।

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SHIV TANDAV


 भगवान शिव  संघार क्यों करते हैं इसका मुख्यय कारण है कि शिव जी के पिता काल निरंजन ने उन्हें संघार के लिए कार्य दे रखा है।  भगवान विष्णु को पालनकर्ता का , तथा ब्रह्मा जी  को उत्पत्ति का कार्य दे रखा है। 

और इसी प्रकार विधिवत रूप से यह सृष्टि चल रही है। परंतु इस काल के भयंकर जाल में हम सभी जीव उलझाए हुए हैं। अब यहां से निकलने का एकमात्र मार्ग जो गीता अध्याय 15 श्लोक 1 से 4 में बताया गया है कि उस तत्वदर्शी संत की खोज कर जो तुम्हें वास्तविक मोक्ष का मार्ग बताएंगे। और उसे जानने के लिए आज पूरे विश्व में एकमात्र तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज ही है।  अवश्य उनके मंगल प्रवचन हमें सुनकर पूर्ण मोक्ष का सही मार्ग पकड़ना चाहिए।

संत रामपाल जी महाराज के मंगल प्रवचन सुनने के लिए अवश्य देखे साधना टीवी शाम 7:30 से 8:30 तक।

वास्तव में हमारे वेद शास्त्रों के अनुसार हमें भक्ति करनी चाहिए तथा व्रत करने से हमें कोई लाभ नहीं है और यह तो हमारे भगवान जैसा कि गीता में मना कर रहे हैं तो फिर हम क्यों शास्त्र विरुद्ध साधना करके हमारे जीवन को और कठिन बनाएं।








Wednesday, June 10, 2020

Bible knowledge

बाइबिल में भगवान का प्रमाण


वास्तव में भगवान एक है। परंतु उसकी पहचान करवाना आज के इस युग में बहुत ही मुश्किल हो रहा है। क्योंकि आध्यात्मिकता की तरफ मनुष्यों का झुकाव अत्यंत कम है। इसलिए हम मन मुताबिक भगवान प्राप्ति के लिए जो जैसा कह दे वैसा  करने लग जाते हैं। सभी पवित्र धर्मों के पवित्र ग्रंथों में प्रमाण के तौर पर एक भगवान की तरफ इशारा किया गया है। जिसकी भक्ति साधना अत्यंत सरल है। और उसे पहचानना बिल्कुल आसान है। 

बाइबिल में भी प्रमाण है कि वह एक परमात्मा कौन है? जो हमारे सभी दुखों का नाश कर हमें सर्व सुख और पूर्ण मोक्ष दिला सकता है।

पवित्र बाईबल में प्रभु मानव सदृश साकार का प्रमाण

पवित्र बाइबल के उत्पत्ति ग्रन्थ पृष्ठ नं. 2 पर, अ. 1:20 - 2:5 पर यह प्रमाण है कि मनुष्य के समान वह परमात्मा दिखता है..! अर्थात साकार है। मानव सदृश्य है। उसे विभिन्न धर्म के मौलवियों और ईसाइयों द्वारा निराकार कहा जाना गलत है। 


पवित्र बाइबल में भगवान ने मनुष्य को शाकाहारी बनने के लिए कहा है परमात्मा ने कहा है कि (उत्पति ग्रंथ अध्याय 1:29)  सुनो, जितने बीज वाले छोटे छोटे पेड़ सारी पृथ्वी के ऊपर हैं। और जितने वृक्षों में बीज वाले फल होते हैं। वे सब मैं ने तुम को दिए हैं।  वे तुम्हारे भोजन के लिये हैं। अर्थात मनुष्य को सिर्फ शाकाहारी भोजन खाने के लिए कहा है।

उत्पत्ति ग्रंथ अध्याय 1:30 - और जितने पृथ्वी के पशु, और आकाश के पक्षी, और पृथ्वी पर रेंगने वाले जन्तु हैं। जिन में जीवन के प्राण हैं।  उन सब के खाने के लिये मैंने सब हरे हरे छोटे पेड़ दिए हैं। 




उत्पति विषय में लिखा है कि परमेश्वर ने मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार उत्पन्न किया। इससे सिद्ध है कि प्रभु भी मनुष्य जैसे शरीर युक्त है तथा छः दिन में सृष्टी रचना करके सातवें दिन तख्त पर जा विराजा।
पवित्र बाइबिल अय्यूब 36: 5   (और्थोडौक्स यहूदी बाइबल - OJB) के अनुसार परमात्मा
परमेश्वर कबीर (शक्तिशाली) है। किन्तु वह लोगों से घृणा नहीं करता है।परमेश्वर कबीर (समरथ) है और विवेकपूर्ण है।बाइबल ने भी स्पष्ट किया है की प्रभु का नाम कबीर है।

अनुवाद कर्ताओ नें कबीर की जगह शक्तिशाली व सामर्थ वाला लिख दिया है। वास्तव में परमात्मा का नाम कबीर है। वेदो में, भगवद गीता में, श्री गुरु ग्रंथ साहिब में और कुरान शरीफ में भी परमात्मा का नाम कबीर है। 



पवित्र बाइबल में यह प्रमाणित हो चुका है कि पूर्ण परमात्मा कबीर परमेश्वर है। ईसा मसीह जी पूर्ण परमेश्वर नहीं है। ईशा जी को तो पूर्ण परमात्मा सतलोक से आकर मिले तथा उन्हें सत्य ज्ञान से परिचित करवाया। और मरते समय तक वे उस पर अडिग रहे। और संघर्ष किया। वास्तव में पूर्ण परमात्मा तो कबीर साहेब हैं। और जैसा कि हम जानते हैं कि परमात्मा कभी किसी मां के गर्भ से जन्म नहीं लेते है। जबकि ईसा मसीह जी तो मां के गर्भ से जन्म लिया था।





जिस तरह से ईसा मसीह जी ने परमात्मा के दिए हुए उस ज्ञान पर अडिग रहकर सत्य के लिए संघर्ष किया था। उसी तरह आज संत रामपाल जी महाराज जो वास्तव में कबीर परमेश्वर जी द्वारा बताई सत्य भक्ति साधना से संपूर्ण विश्व को अवगत करा रहे हैं। और उनका घोर विरोध किया जा रहा है। परंतु वे अपने मार्ग पर अडिग हैं। और आज उनके लाखों शिष्य हैं। परमेश्वर कबीर साहेब की असीम कृपा से संत रामपाल जी महाराज के सभी शिष्य सत्य भक्ति साधना करके मोक्ष के पूर्ण हकदार हैं।

आप भी पहचान या उस पूर्ण परमात्मा को देखिए साधना टीवी चैनल शाम 7:30 से 8:30 तक 
और देखिए ईश्वर टीवी चैनल शाम 8:30 से 9:30 तक








Wednesday, May 20, 2020

संत रामपाल जी द्वारा समाज सुधार के कार्य

संत रामपाल जी महाराज तथा उनके अनुयायियों द्वारा समाज में एक अद्भुत ज्ञान की क्रांति की शुरुआत की गई है। जो देश ही नहीं पूरे विश्व को बदलने की क्षमता रखती है। और यह सब होगा संत रामपाल जी महाराज द्वारा सत्संग के माध्यम से दिए जाने वाले आध्यात्मिक ज्ञान से....!!

जैसा कि हम जानते हैं कि समाज में बहुत सी बुराइयां घर कर चुकी है जो देश की दशा और दिशा दोनों बदल रही हैं। और इसी में सुधार के लिए और विश्व में भारत देश को एक अलग पहचान दिलाने के लिए संत रामपाल जी महाराज का उनके अनुयायियों द्वारा किए गए इन सभी कार्यों की हम विवरणात्मक रूप से यहां चर्चा करेंगे।


1. दहेज प्रथा और बेटी बचाओ जैसे सरकार के चलाई हुई योजनाओं को वास्तव में एक नई दिशा संत रामपाल जी महाराज के द्वारा दी जा रही है। क्योंकि संत रामपाल जी महाराज के द्वारा मात्र 17 मिनट में शादी का एक अनोखा तरीका लगभग पिछले कई सालों से चल रहा है। जिसमें बिना मतलब की फिजूलखर्ची को पूरी तरह से बंद किया जा चुका है। जो समाज आज बेटियों को बोझ समझ रहा था। वह आज बेटियों को अपनाना शुरू करेगा। बहुत से बेटियों के पिता शादी के समय अत्यधिक दहेज देने और खर्चे की वजह से भारी कर्ज के बोझ के तले दब जाते हैं और उनका जीवन उस कार्य को चुकाने में पूरी तरह बर्बाद हो जाता है और इस तरह की मुहिम से समाज में एक नई क्रांति आई है जो आज इस लोक डाउन के समय में मेरे को लगता है। सिर्फ संत रामपाल जी महाराज के अनुयाई ही नहीं पूरा देश इसकी अनुपालना कर रहा है।



2. समाज में कई प्रकार की  कुरीतियां और अव्यवस्थाएं व्याप्त हैं।  जैसे मृत्यु भोज ,दहेज प्रथा, कन्या भ्रुण हत्या और भी कई प्रकार के अंधविश्वास जो सभी ज्ञान के अभाव की वजह से समाज में आज बहुत गहराई से जम चुके हैं। संत रामपाल जी महाराज की आध्यात्मिक ज्ञान की वजह से आज समाज में संत रामपाल जी महाराज का कोई भी अनुयाई इन सभी कुरीतियों का सामाजिक बहिष्कार करता है। और यदि कोई भी संत रामपाल जी महाराज का सत्संग सुनता है तो है श्वेता ही इन कृतियों से घृणा करने लगता है जो कि बेवजह समाज में बनाई गई है और इनका हमारे जीवन पर बोझ के अलावा कोई औचित्य नहीं है।



3. आज जिस तरह की परिस्थिति लोग डाउन में बनी हुई है उससे बहुत से गरीब मजदूर लोग घरों में 2 महीने से काम नहीं चलने की वजह से बहुत अधिक परेशान है  उनके सामने खाने-पीने किराया देने जैसे कई तरह के खर्चे हैं जिनसे वह परेशान हैं ऐसे गरीब और असहाय लोगों की मदद के लिए संत रामपाल जी महाराज के अनुयायियों ने बहुत बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया है संत रामपाल जी ने बताया है कि गरीबों की मदद के लिए हमेशा आगे रहो और भूखे व्यक्ति को भोजन देने का बहुत अधिक पुण्य मिलता है और संत जी के अनुयायियों ने इस पुण्य के कार्य में बढ़-चढ़कर भागीदारी दिखाई है पूरे देश में संत रामपाल जी महाराज के लगभग सभी आश्रमों में गरीब मजदूरों को आश्रय दिया गया और मुफ्त में सुबह-शाम भोजन भंडारे की व्यवस्था की गई और इससे प्रत्येक मजदूर बहुत खुश था। इस तरह की व्यवस्था देखकर मजदूर बहुत खुश नजर आए। 


4. 
संत रामपाल जी महाराज द्वारा ट्विटर पर हर सप्ताह है। देश में व्याप्त सामाजिक बुराइयों और व्यसनों के खिलाफ कई प्रकार के ट्विटर ट्रेंड चलाए जाते हैं। जो समाज में एक सुधारात्मक संदेश के उद्देश्य से चलाए जाते हैं।  हर सप्ताह ऐसे ट्रेंड आपको ट्विटर पर एक नंबर पर देखने को जरूर मिलेंगे इन्हीं में से कुछ है। जैसे  शराब पीने के विरोध में ट्रेंड, बॉलीवुड में अश्लीलता के विरोध में ट्रेंड, शास्त्र अनुसार सत्य साधना के विषय में जानकारी के लिए ट्रेंड, ऐसे कई प्रकार के ट्रेंड समाज सुधार के उद्देश्य से चलाए जाते हैं।

5. संत रामपाल जी के सभी अनुयाई पूरे देश में ब्लड डोनेशन के लिए सदैव तैयार रहते हैं और सिर्फ ब्लड डोनेशन ही नहीं हॉस्पिटल्स में देहदान के लिए भी यह हमेशा आगे रहते हैं यह सब संत रामपाल जी महाराज के ज्ञान से संभव हो पाया है जिससे हम यह समझ पाए कि इस देह का मृत्यु के पश्चात कोई उपयोग नहीं है जब तक इस देश में आत्मा है तब तक हमें इसका सही उपयोग किया जाना चाहिए जैसे कि सद्भक्ति और अच्छे विचारों से समाज सेवा के लिए सदैव तत्पर रहना तब तो इस देह का उपयोग है अन्यथा मृत्यु पश्चात इसका कोई उपयोग नहीं है और संत जी के इन्हीं सत्संग और ज्ञान की वजह से आज सभी अनुयाई देहदान और ब्लड डोनेशन में सदैव आगे रहते हैं।

6. संत रामपाल जी महाराज द्वारा गीता वेद शास्त्र बाइबल कुरान गुरु ग्रंथ साहिब सभी पवित्र धर्म की पवित्र पुस्तकों के आधार पर एक पूर्ण परमात्मा की सही भक्ति के बारे में परिचित करवाया है। जो आज तक किसी धर्मगुरु, मठआदिश्वर ,शंकराचार्य आदि इसके बारे में परिचित नहीं करवाया। जिससे समाज गलत दिशा की ओर जा रहा है। 
संत रामपाल जी के द्वारा वास्तव में मनुष्य जीवन का क्या उद्देश्य है..?
और इस सृष्टि की रचना कैसे हुई..?
 ऐसे जटिल सवालों का उत्तर अपने आध्यात्मिक सत्संग और पवित्र पुस्तकों के माध्यम से दिया है। और वास्तविक सद्भक्ति सभी वेद शास्त्रों के आधार पर प्रमाणित करके बताई है। जो समाज सुधार और मनुष्य जीवन के मूल उद्देश्य पूर्ति हेतु सभी मनुष्य के लिए बहुत उपयोगी है।


ऐसे ही अनेकों कार्य संत रामपाल जी महाराज उनके अनुयायियों के माध्यम से करते रहते हैं। 

 संत रामपाल जी महाराज के बारे मेंं अधिक जानकारी तथा उनके अनमोल मंगल प्रवचन सुनने के लिए अवश्य देखें साधना टीवी शाम 7:30 से 8:30 तक 
और देखें ईश्वर टीवी शाम 8:30 से 9:30 तक

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Thursday, May 14, 2020

आध्यात्मिक ज्ञान से देश का पुनरुत्थान

आज हम एक ऐसे मुद्दे पर बात करेंगे जो देश के लिए अति आवश्यक है। वह है देश का पुनरुत्थान...!
जैसा कि हम जानते हैं पुनरुत्थान का अर्थ है उन्नति..! अर्थात देश का हर विभाग में विकास हो और सामाजिक, आर्थिक, आध्यात्मिक आदि सभी विषयों में समाज और देश की उन्नति हो। परंतु इन सब को हम मनुष्य के विचारों से जोड़ेंगे।  आज भी गांव और शहरों में बहुत से लोग रूढ़िवादिता और पाखंडवाद का शिकार हैं। जिससे समाज और देश उन्नति में बाधा उत्पन्न हो रही है। इसमें मनुष्य का कोई दोष नहीं है। क्योंकि आज तक जितने भी संत महात्मा महापुरुष हुए हैं। सभी ने हमें उल्टा ही ज्ञान पढ़ाया है। जो हमें पाखंडवाद के इस गहरे कुएं की और दखेलता जा रहा है। और आज देखा देखी मानव समाज अपने विवेक का प्रयोग करें बिना ही इस दलदल में इतना फंस गया है कि कोई यदि निकालने की कोशिश भी करें तो वह इसे मानने को तैयार ही नहीं है। और कहीं ना कहीं हम यह कह सकते हैं कि देश का पुनरुत्थान और आध्यात्मिक उन्नति का सीधा संबंध मनुष्य के विचारों से हैं। 



अब यहां पर हम जानते हैं कि बहुत से एनजीओ, निजी और सरकारी संस्थान देश की उन्नति के लिए और देश को पाखंडवाद और नशे जैसी बीमारी से बचाने के लिए बहुत प्रयास कर रहे हैं। बहुत से ऐसे संस्थान है जो नशा छुड़ाने के लिए प्रयत्न कर रहे हैं। भ्रूण हत्या जैसी समस्या से लड़ने के लिए आज सरकार ने कई प्रकार की मुहिम चला रखी हैं।  ऐसी ही बहुत सी समस्याएं देश के सामने हैं जैसे दहेज प्रथा, सामाजिक कुरीतियां, रूढ़िवादिता,  पाखंडवाद, जमाखोरी, रिश्वतखोरी , नशा आदि।  यह सभी समस्याएं देश को आंतरिक रुप से कमजोर करती जा रही है। इसके बहुत प्रयत्न हो रहे हैं। परंतु सभी असफल हैं। इतिहास में बहुत से ऐसे महापुरुष हुए हैं जिन्होंने भरसक प्रयत्न किए हैं। देश की इस स्थिति में सुधार के लिए तथा देश की उन्नति के लिए परंतु इसका कोई परिणाम हमारे सामने नहीं आया है। 

देश का इस दलदल में फंसने का मुख्य कारण निम्न है।
 ✔️ज्ञान का अभाव
 ✔️भगवान से डर का अभाव
✔️ आध्यात्मिकता की ओर झुकाव में न होना
 ✔️समाज में नास्तिकता का अधिक प्रभाव 
✔️पश्चिमी संस्कृति का प्रभाव 
✔️अश्लील फिल्में 
✔️बॉलीवुड की युवाओं और समाज में अधिक सक्रियता
✔️ सामाजिक छुआछूत

अब इन सभी से बचने के लिए हमें भगवान के संविधान और ज्ञान को समझने की आवश्यकता है जिससे प्रत्येक मनुष्य में भगवान से डर बना रहे और वह कोई गलती ना करें।

अब यदि मनुष्य को परमात्मा के संविधान अर्थार्त विधान का ज्ञान होगा। तो वह भगवान से डर कर कभी गलती नहीं करेगा और मर्यादा में रहकर ज्ञान आधार से जीवन जिया करेगा। और इसी को सामाजिक और देश के आध्यात्मिक पुनरुत्थान की पहली सीढ़ी कहा जा सकता है।

आज के समय में संत रामपाल जी महाराज द्वारा दिया गया आध्यात्मिक ज्ञान हमें समाज में व्याप्त सभी बुराइयों से परिचित करवाता है। तथा समाज में व्याप्त इस पाखंडवाद को पूर्णतया समाप्त करने के लिए संत रामपाल जी महाराज द्वारा चलाई गई मुहिम बहुत तेज गति से कार्य कर रही है। और समाज के हर वर्ग का व्यक्ति इस में बढ़ चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। आज उनके अनुयाई दहेज प्रथा, भ्रूण हत्या जैसी बुराइयों से बचने के लिए बहुत ही कम पैसे में लड़की या लड़के का विवाह कर रहे हैं। न दहेज लेते हैं। न किसी को दहेज देते हैं। इसके अलावा इनके द्वारा इनके अनुयायियों को उपदेश दिया जाता है कि नशा नहीं करना चाहिए। नशे का सेवन करने से मनुष्य को 70 जन्म तक कुत्ता के जीवन भोगने पड़ते हैं। और इस भय से सभी भगवान के द्वारा बताई गई मर्यादा में रहकर पूर्ण परमात्मा कबीर देव की भक्ति करते हैं। जो देश और व्यक्ति के लिए लाभदायक है।



संत रामपाल जी महाराज के द्वारा बताई गई भक्ति साधना शास्त्र विधि अनुसार और प्रमाणित होने की वजह से इसमें किसी प्रकार का कोई पाखंडवाद नहीं है। तथा सामाजिक रूढ़िवादिता का बहिष्कार करते हुए। देश में एक साफ-सुथरा और स्वच्छ समाज निर्माण कर रहे हैं। एक ऐसा समाज जिसमें किसी प्रकार की कोई बुराई का नामोनिशान नहीं है जिसमें कोई नशा नहीं करता। जिस में कोई रिश्वतखोरी और सामाजिक बुराइयों से बचकर कार्य करते हैं। और इसी से समाज का पुनरुत्थान हो सकता है जो आगे बढ़कर पूरे देश  के विकास में सहायक होगा।

संत रामपाल जी महाराज के बारे में अधिक जानकारी के लिए अवश्य देखें साधना टीवी चैनल शाम 7:30 से 8:30 तक 

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Wednesday, May 13, 2020

लाइलाज बीमारियों का आध्यात्मिक इलाज...!

मानव के अतीत को देखा जाए तो हमें कई प्रकार की बीमारियों और महामारीयों का सामना करना पड़ा है। और इन्हीं के साथ हम हमारे इस संघर्षपूर्ण जीवन की घड़ी को निरंतर जीते हुए आज इस दौर तक पहुंचे हैं। और आज भी बीमारियों ने मनुष्य को बहुत बुरी तरह से जकड़ रखा है। 
क्या इनसे छुटकारा पाया जा सकता है..?
आखिर इसके पीछे क्या कारण है..??
 और इसका क्या इलाज है..?? 
आज हम इसी के बारे में बात करेंगे। 

अब यहां पर हम बात करें इनके इलाज की तो इन बीमारियों का इलाज साइंस यानी डॉक्टरों के द्वारा किया जा रहा है। भूतकाल में कई प्रकार के वैद होते थे। जो अलग-अलग आयुर्वेदिक दवाइयों से बीमारियों का इलाज किया करते थे। जैसे-जैसे बीमारियां अलग-अलग आती गई और इनका स्तर बढ़ता गया।साइंस की प्रगति के साथ इनकी इलाज के नए-नए  माध्यम खोजे गए। परंतु आज तक इनका कोई स्थाई इलाज है नहीं मिल पाया..!! और इन बीमारियों ने दिन-ब-दिन हमें  चारों ओर से घेर लिया। आज कोरोना जैसी महामारी ने पूरे विश्व को संकट में डाल दिया है। और ऐसी ही कई लाइलाज बीमारियां जैसे कैंसर, एड्स आदि का कोई इलाज नहीं मिल पाया।

परंतु इन सब के इतर एक स्थाई इलाज खोजा गया है..! जो अध्यात्म से जुड़ा हुआ है। अर्थात आध्यात्मिक भक्ति मार्ग से इन बीमारियों का जड़ से इलाज प्राप्त किया जा सकता है। और कई लोगों ने इनका प्रैक्टिकल भी किया तो वे इस पर खरे उतरे अर्थात लाइलाज बीमारियों का भी उन्हें इलाज मिल गया। ऐसे ही कुछ उदाहरण है जो हम यहां पर देना चाहेंगे।

आध्यात्मिक नजरिए से बात करी जाए तो दरअसल बीमारियों का मुख्य कारण हमारे पूर्व जन्मों तथा वर्तमान मनुष्य जीवन में किए गए पाप कर्मों का ही फल है। और यह सत्य भी है क्योंकि पाप और पुण्य यह दो अलग-अलग कर्म फल है पाप करने से आपको उसका कर्म फल भी भोगना होगा। तथा पुण्य करने से आपका भला भी होगा। 


 भगवान भी पाप पुण्य के इस कर्म फल को भोगते हैं। उदाहरण के लिए भगवान श्री राम ने बाली को वर्ष की ओट लेकर धोखे से मार दिया और फिर श्री कृष्ण के रूप में उन्हें बालिया भील के द्वारा मारा गया। कहने का अर्थ है इस कर्म फल के सिस्टम में भगवान भी आते हैं। 

जैसा कि हमारे वेद शास्त्र बताते हैं। इससे बचने का एक ही इलाज है। पूर्ण परमात्मा की दी हुई सद्भक्ति जो पूर्ण गुरु के माध्यम से हमें दी जाती है। वह पूरी श्रद्धा से करनी चाहिए। तथा शास्त्र अनुसार साधना मनुष्य को सभी प्रकार से पूर्ण सुख प्रदान करती है। 


गीता अध्याय 15 श्लोक 1 से 4 में यह बताया गया है कि हे अर्जुन इस संसार रूपी उल्टे वृक्ष की झड़ पूर्ण परमात्मा है। और उसके बारे में जानकारी के लिए तू तत्वदर्शी संत की खोज कर तथा आदर पूर्वक उन्हें प्रणाम कर और उनसे नाम उपदेश लेकर शास्त्र अनुरूप सद्भक्ति कर उसी से तेरा कल्याण होगा।
अब यदि हम शास्त्र अनुकूल पूर्ण परमात्मा की सद्भक्ति तत्वदर्शी संत की शरण ग्रहण करके करते हैं। तो उससे हमें किसी प्रकार का रोग कष्ट नहीं हो सकता....!! 

क्योंकि पूर्ण परमात्मा हमारे सभी पाप कर्मों को समाप्त कर देता है।  साथ ही हम पूर्ण मोक्ष भी प्राप्त कर सकते हैं।

सबसे आवश्यक बात यह है कि आज के समय में तत्वदर्शी संत सिर्फ संत रामपाल जी महाराज हैं। जो शास्त्र अनुकूल भक्ति बताते हैं। तथा गीता अध्याय 15 श्लोक 1 से 4 में बताए गए संसार रूपी उल्टे वृक्ष की सही व्याख्या करते हैं।


अधिक जानकारी के लिए अवश्य देखें साधना टीवी शाम 7:30 से 8:30 तक 

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Friday, May 8, 2020

सतलोक : एक अविनाशी स्थान और वास्तविक स्वर्ग

 हम एक ऐसे स्थान के बारे में बात करेंगे जो वास्तव में अविनाशी है..!!  अर्थात जिसका विनाश नहीं होता है...!! जहां पर किसी प्रकार का दुख नहीं है। जिसे मोक्ष धाम भी कहा जाता है। 
हां यह बातें थोड़ी अजीब जरूर है...!! 
परंतु यह पूर्ण सत्य है। और इनकी सत्यता का विवेचन करेंगे। क्योंकि सतलोक एक ऐसा स्थान है। जहां पर किसी प्रकार का रोग एवम पीड़ा नहीं है...!! 
वहां पर सिर्फ सुख ही सुख है।


हम सभी पहले सतलोक में रहते थे। वहां पर जन्म मरण नहीं होता था। अर्थात हमारा मनुष्य शरीर सदा वहां पर ऐसा ही रहता था। हम सभी मनुष्य शरीर धारी और अन्य 8400000 योनियों में भटक रहे जीव उसी अविनाशी स्थान सतलोक के निवासी हैं। जो दुर्भाग्यवश इस काल लोक में आ गए हैं। और समय-समय पर हमारी मृत्यु होती रहती है। और फिर हमें नया जीवन मिलता है। हम इस काल की भूल भुलैया में ऐसे ही दुख उठाए जा रहे हैं। और हमारे उस निज स्थान सतलोक के बारे में कोई विचार नहीं कर रहा है।

सतलोक के स्वामी और पूर्ण प्रभु अविनाशी कबीर साहेब है। जिनका प्रमाण वेदो में लिखा है। वही पूर्णब्रह्म परमात्मा है। इन्होंने ही इस अविनाशी आत्मा की रचना की है।


 सतलोक के विषय में संत गरीबदास जी ने वर्णन किया है। संत गरीबदास जी एक प्रसिद्ध संत हैं। जिनको स्वयं कबीर साहेब आकर मिलेे थे। और उस और उस अविनाशी स्थान की उसके बाद संत गरीबदास जी ने कलम तोड़ व्याख्या की है उन्होंने कहा है कि

" मन तू चल रे सुख के सागर, जहाँ शब्द सिंधु रतनागर।।"
"जहाँ संखो लहर मेहर की उपजे, कहर नही जहाँ कोई।
दास गरीब अचल अविनाशी, सुख का सागर सोई।।"

अर्थात गरीबदास जी महाराज कहना चाहते हैं कि सतलोक एक ऐसा स्थान है जहां पर कोई कहर नहीं है। वहां पर सुख ही सुख है। वह एक अविनाशी स्थान है। जो वास्तविक सुख का सागर है। और हम सभी से आग्रह कर हैं कि आप उस स्थान की और प्रस्थान करें।

सतलोक सुख का सागर है वहां पर प्रत्येक वस्तु अमर तत्वों से बनी हुई है वह कभी खराब नहीं होती है। सतलोक एक ऐसा स्थान है जहां पर न मृत्यु होती है और ना ही किसी प्रकार का रोग है....!!
मनुष्य जीवन का मूल उद्देश्य सत भक्ति कर पूर्ण मोक्ष प्राप्त करना है। और पूर्ण मोक्ष की प्राप्ति सच्चे संत अर्थात तत्वदर्शी संत की शरण ग्रहण करने पर ही प्राप्त हो सकता है। जैसा कि गीता अध्याय 15 श्लोक 1 से 4 में वर्णित है।
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मनुष्य जीवन के इस मूल उद्देश्य की पूर्ति हेतु सत्य भक्ति के सही मार्ग और ऐसे ही रोचक विषयों पर अधिक जानकारी के लिए अवश्य देखिए साधना टीवी शाम 7:30 से 8:30 तक।

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Thursday, May 7, 2020

श्राद्ध से मुक्ति नही..!


भारतीय हिंदू समाज में कई अलग-अलग प्रकार की पाखंड पूजा चलती हैं जिनका मनुष्य जीवन पर बोझ के अलावा कोई औचित्य नहीं है। इन्हीं में से एक है श्राद्ध क्रिया कर्म जो कि एक पाखंड पूजा है। आज इस ब्लॉग के माध्यम से हम यह जानेंगे आखिर शास्त्रों में श्राद्ध क्रिया कर्म के बारे में क्या लिखा है....!!
 तथा मनुष्य जीवन पर भक्ति मार्ग में श्राद्ध क्रिया कर्म क्यों बाधक है....!!
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जैसे कि गीता अध्याय 9 श्लोक 25 में लिखा है कि जो श्राद्ध आदि करते हैं। वह मोक्ष प्राप्त नहीं कर पाते हैं। इसी तरह से गीता जी के एक अन्य अध्याय 17 श्लोक 4 के अनुसार श्राद्ध कर्म को तामसिक पूजा की श्रेणी में बताया गया है। यदि श्रीमद्भागवत गीता ही पित्र पूजा एवम श्राद्ध निकलने को गलत बताती है। तो हम क्यों ऐसी पाखंड पूजा और मन मुखी साधना करके दुगुना पाप इकट्ठा कर रहे हैं।



अब एक सामान्य व्यक्ति आसानी से समझ सकता है कि आखिर जब से व्यक्ति की मृत्यु होती है। तब से पंडित कहते हैं कि इनके पिंड भरवाए जाएं। इनसे उसकी आत्मा स्वर्गवासी होगी और उसके बाद 12वीं, 13वीं के समय अलग-अलग क्रिया कर्म कराने के पाखंड करे जाते हैं। और कहा जाता है कि इसकी आत्मा को शांति मिली या फिर उसको स्वर्ग की प्राप्ति हुई। तो फिर उसके बाद किया जाने वाला यह श्राद्ध क्रिया कर्म हर साल क्यों किया जाता है...!!
इसका क्या औचित्य है....!!

और जैसा कि हम जानते हैं कि गीता जी में लिखा है कि शास्त्र अनुकूल साधना करने से पूर्ण मोक्ष मिलता है। अगर पंडितों के द्वारा बताई गई साधना ही शास्त्र अनुसार होती तो हमें श्राद्ध निकालने की जरूरत ही नहीं होती। क्योंकि यदि हमने जीवन भर शास्त्र अनुकूल साधना करी है। तो हमारा मोक्ष स्वत ही हो जाता है। फिर हम भूत ,पित्र नहीं बनते.....!!


अब हमें हमारे मनुष्य जीवन के मूल उद्देश्य को जानना अति आवश्यक है। और वह है शास्त्र अनुकूल भक्ति करना जिससे हमारा पूर्ण मोक्ष स्वत: ही हो। इसके लिए हमें किसी भी क्रिया कर्म की आवश्यकता नहीं है। और यह जो श्राद्ध निकालने की क्रिया है। यह पूर्णतया व्यर्थ है...! 
इसका हमारे मोक्ष से कोई लेना-देना नहीं है।

श्राद्ध निकालना शास्त्र विरुद्ध साधना है..!! इसके शास्त्रों में और अधिक प्रमाण के लिए, मार्कंडेय पुराण में प्रमाण के लिए अवश्य देखें यह वीडियो देखने के लिए यहां क्लिक करें👇👇


मनुष्य जीवन का मूल उद्देश्य भक्ति करना है तथा शास्त्रानुसार सद्भक्ति के लिए अवश्य देखिए साधना टीवी शाम 7:30 से 8:30 तक।


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