Importance Of Spiritual Knowledge

Wednesday, May 13, 2020

लाइलाज बीमारियों का आध्यात्मिक इलाज...!

मानव के अतीत को देखा जाए तो हमें कई प्रकार की बीमारियों और महामारीयों का सामना करना पड़ा है। और इन्हीं के साथ हम हमारे इस संघर्षपूर्ण जीवन की घड़ी को निरंतर जीते हुए आज इस दौर तक पहुंचे हैं। और आज भी बीमारियों ने मनुष्य को बहुत बुरी तरह से जकड़ रखा है। 
क्या इनसे छुटकारा पाया जा सकता है..?
आखिर इसके पीछे क्या कारण है..??
 और इसका क्या इलाज है..?? 
आज हम इसी के बारे में बात करेंगे। 

अब यहां पर हम बात करें इनके इलाज की तो इन बीमारियों का इलाज साइंस यानी डॉक्टरों के द्वारा किया जा रहा है। भूतकाल में कई प्रकार के वैद होते थे। जो अलग-अलग आयुर्वेदिक दवाइयों से बीमारियों का इलाज किया करते थे। जैसे-जैसे बीमारियां अलग-अलग आती गई और इनका स्तर बढ़ता गया।साइंस की प्रगति के साथ इनकी इलाज के नए-नए  माध्यम खोजे गए। परंतु आज तक इनका कोई स्थाई इलाज है नहीं मिल पाया..!! और इन बीमारियों ने दिन-ब-दिन हमें  चारों ओर से घेर लिया। आज कोरोना जैसी महामारी ने पूरे विश्व को संकट में डाल दिया है। और ऐसी ही कई लाइलाज बीमारियां जैसे कैंसर, एड्स आदि का कोई इलाज नहीं मिल पाया।

परंतु इन सब के इतर एक स्थाई इलाज खोजा गया है..! जो अध्यात्म से जुड़ा हुआ है। अर्थात आध्यात्मिक भक्ति मार्ग से इन बीमारियों का जड़ से इलाज प्राप्त किया जा सकता है। और कई लोगों ने इनका प्रैक्टिकल भी किया तो वे इस पर खरे उतरे अर्थात लाइलाज बीमारियों का भी उन्हें इलाज मिल गया। ऐसे ही कुछ उदाहरण है जो हम यहां पर देना चाहेंगे।

आध्यात्मिक नजरिए से बात करी जाए तो दरअसल बीमारियों का मुख्य कारण हमारे पूर्व जन्मों तथा वर्तमान मनुष्य जीवन में किए गए पाप कर्मों का ही फल है। और यह सत्य भी है क्योंकि पाप और पुण्य यह दो अलग-अलग कर्म फल है पाप करने से आपको उसका कर्म फल भी भोगना होगा। तथा पुण्य करने से आपका भला भी होगा। 


 भगवान भी पाप पुण्य के इस कर्म फल को भोगते हैं। उदाहरण के लिए भगवान श्री राम ने बाली को वर्ष की ओट लेकर धोखे से मार दिया और फिर श्री कृष्ण के रूप में उन्हें बालिया भील के द्वारा मारा गया। कहने का अर्थ है इस कर्म फल के सिस्टम में भगवान भी आते हैं। 

जैसा कि हमारे वेद शास्त्र बताते हैं। इससे बचने का एक ही इलाज है। पूर्ण परमात्मा की दी हुई सद्भक्ति जो पूर्ण गुरु के माध्यम से हमें दी जाती है। वह पूरी श्रद्धा से करनी चाहिए। तथा शास्त्र अनुसार साधना मनुष्य को सभी प्रकार से पूर्ण सुख प्रदान करती है। 


गीता अध्याय 15 श्लोक 1 से 4 में यह बताया गया है कि हे अर्जुन इस संसार रूपी उल्टे वृक्ष की झड़ पूर्ण परमात्मा है। और उसके बारे में जानकारी के लिए तू तत्वदर्शी संत की खोज कर तथा आदर पूर्वक उन्हें प्रणाम कर और उनसे नाम उपदेश लेकर शास्त्र अनुरूप सद्भक्ति कर उसी से तेरा कल्याण होगा।
अब यदि हम शास्त्र अनुकूल पूर्ण परमात्मा की सद्भक्ति तत्वदर्शी संत की शरण ग्रहण करके करते हैं। तो उससे हमें किसी प्रकार का रोग कष्ट नहीं हो सकता....!! 

क्योंकि पूर्ण परमात्मा हमारे सभी पाप कर्मों को समाप्त कर देता है।  साथ ही हम पूर्ण मोक्ष भी प्राप्त कर सकते हैं।

सबसे आवश्यक बात यह है कि आज के समय में तत्वदर्शी संत सिर्फ संत रामपाल जी महाराज हैं। जो शास्त्र अनुकूल भक्ति बताते हैं। तथा गीता अध्याय 15 श्लोक 1 से 4 में बताए गए संसार रूपी उल्टे वृक्ष की सही व्याख्या करते हैं।


अधिक जानकारी के लिए अवश्य देखें साधना टीवी शाम 7:30 से 8:30 तक 

और विजिट करें हमारी वेबसाइट...👇







No comments:

Post a Comment