आज हम एक ऐसे मुद्दे पर बात करेंगे जो देश के लिए अति आवश्यक है। वह है देश का पुनरुत्थान...!
जैसा कि हम जानते हैं पुनरुत्थान का अर्थ है उन्नति..! अर्थात देश का हर विभाग में विकास हो और सामाजिक, आर्थिक, आध्यात्मिक आदि सभी विषयों में समाज और देश की उन्नति हो। परंतु इन सब को हम मनुष्य के विचारों से जोड़ेंगे। आज भी गांव और शहरों में बहुत से लोग रूढ़िवादिता और पाखंडवाद का शिकार हैं। जिससे समाज और देश उन्नति में बाधा उत्पन्न हो रही है। इसमें मनुष्य का कोई दोष नहीं है। क्योंकि आज तक जितने भी संत महात्मा महापुरुष हुए हैं। सभी ने हमें उल्टा ही ज्ञान पढ़ाया है। जो हमें पाखंडवाद के इस गहरे कुएं की और दखेलता जा रहा है। और आज देखा देखी मानव समाज अपने विवेक का प्रयोग करें बिना ही इस दलदल में इतना फंस गया है कि कोई यदि निकालने की कोशिश भी करें तो वह इसे मानने को तैयार ही नहीं है। और कहीं ना कहीं हम यह कह सकते हैं कि देश का पुनरुत्थान और आध्यात्मिक उन्नति का सीधा संबंध मनुष्य के विचारों से हैं।
अब यहां पर हम जानते हैं कि बहुत से एनजीओ, निजी और सरकारी संस्थान देश की उन्नति के लिए और देश को पाखंडवाद और नशे जैसी बीमारी से बचाने के लिए बहुत प्रयास कर रहे हैं। बहुत से ऐसे संस्थान है जो नशा छुड़ाने के लिए प्रयत्न कर रहे हैं। भ्रूण हत्या जैसी समस्या से लड़ने के लिए आज सरकार ने कई प्रकार की मुहिम चला रखी हैं। ऐसी ही बहुत सी समस्याएं देश के सामने हैं जैसे दहेज प्रथा, सामाजिक कुरीतियां, रूढ़िवादिता, पाखंडवाद, जमाखोरी, रिश्वतखोरी , नशा आदि। यह सभी समस्याएं देश को आंतरिक रुप से कमजोर करती जा रही है। इसके बहुत प्रयत्न हो रहे हैं। परंतु सभी असफल हैं। इतिहास में बहुत से ऐसे महापुरुष हुए हैं जिन्होंने भरसक प्रयत्न किए हैं। देश की इस स्थिति में सुधार के लिए तथा देश की उन्नति के लिए परंतु इसका कोई परिणाम हमारे सामने नहीं आया है।
देश का इस दलदल में फंसने का मुख्य कारण निम्न है।
✔️ज्ञान का अभाव
✔️भगवान से डर का अभाव
✔️ आध्यात्मिकता की ओर झुकाव में न होना
✔️समाज में नास्तिकता का अधिक प्रभाव
✔️पश्चिमी संस्कृति का प्रभाव
✔️अश्लील फिल्में
✔️बॉलीवुड की युवाओं और समाज में अधिक सक्रियता
✔️ सामाजिक छुआछूत
अब इन सभी से बचने के लिए हमें भगवान के संविधान और ज्ञान को समझने की आवश्यकता है जिससे प्रत्येक मनुष्य में भगवान से डर बना रहे और वह कोई गलती ना करें।
अब यदि मनुष्य को परमात्मा के संविधान अर्थार्त विधान का ज्ञान होगा। तो वह भगवान से डर कर कभी गलती नहीं करेगा और मर्यादा में रहकर ज्ञान आधार से जीवन जिया करेगा। और इसी को सामाजिक और देश के आध्यात्मिक पुनरुत्थान की पहली सीढ़ी कहा जा सकता है।
आज के समय में संत रामपाल जी महाराज द्वारा दिया गया आध्यात्मिक ज्ञान हमें समाज में व्याप्त सभी बुराइयों से परिचित करवाता है। तथा समाज में व्याप्त इस पाखंडवाद को पूर्णतया समाप्त करने के लिए संत रामपाल जी महाराज द्वारा चलाई गई मुहिम बहुत तेज गति से कार्य कर रही है। और समाज के हर वर्ग का व्यक्ति इस में बढ़ चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। आज उनके अनुयाई दहेज प्रथा, भ्रूण हत्या जैसी बुराइयों से बचने के लिए बहुत ही कम पैसे में लड़की या लड़के का विवाह कर रहे हैं। न दहेज लेते हैं। न किसी को दहेज देते हैं। इसके अलावा इनके द्वारा इनके अनुयायियों को उपदेश दिया जाता है कि नशा नहीं करना चाहिए। नशे का सेवन करने से मनुष्य को 70 जन्म तक कुत्ता के जीवन भोगने पड़ते हैं। और इस भय से सभी भगवान के द्वारा बताई गई मर्यादा में रहकर पूर्ण परमात्मा कबीर देव की भक्ति करते हैं। जो देश और व्यक्ति के लिए लाभदायक है।
संत रामपाल जी महाराज के द्वारा बताई गई भक्ति साधना शास्त्र विधि अनुसार और प्रमाणित होने की वजह से इसमें किसी प्रकार का कोई पाखंडवाद नहीं है। तथा सामाजिक रूढ़िवादिता का बहिष्कार करते हुए। देश में एक साफ-सुथरा और स्वच्छ समाज निर्माण कर रहे हैं। एक ऐसा समाज जिसमें किसी प्रकार की कोई बुराई का नामोनिशान नहीं है जिसमें कोई नशा नहीं करता। जिस में कोई रिश्वतखोरी और सामाजिक बुराइयों से बचकर कार्य करते हैं। और इसी से समाज का पुनरुत्थान हो सकता है जो आगे बढ़कर पूरे देश के विकास में सहायक होगा।
संत रामपाल जी महाराज के बारे में अधिक जानकारी के लिए अवश्य देखें साधना टीवी चैनल शाम 7:30 से 8:30 तक
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Nice post
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