भारतीय हिंदू समाज में कई अलग-अलग प्रकार की पाखंड पूजा चलती हैं जिनका मनुष्य जीवन पर बोझ के अलावा कोई औचित्य नहीं है। इन्हीं में से एक है श्राद्ध क्रिया कर्म जो कि एक पाखंड पूजा है। आज इस ब्लॉग के माध्यम से हम यह जानेंगे आखिर शास्त्रों में श्राद्ध क्रिया कर्म के बारे में क्या लिखा है....!!
तथा मनुष्य जीवन पर भक्ति मार्ग में श्राद्ध क्रिया कर्म क्यों बाधक है....!!
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जैसे कि गीता अध्याय 9 श्लोक 25 में लिखा है कि जो श्राद्ध आदि करते हैं। वह मोक्ष प्राप्त नहीं कर पाते हैं। इसी तरह से गीता जी के एक अन्य अध्याय 17 श्लोक 4 के अनुसार श्राद्ध कर्म को तामसिक पूजा की श्रेणी में बताया गया है। यदि श्रीमद्भागवत गीता ही पित्र पूजा एवम श्राद्ध निकलने को गलत बताती है। तो हम क्यों ऐसी पाखंड पूजा और मन मुखी साधना करके दुगुना पाप इकट्ठा कर रहे हैं।
अब एक सामान्य व्यक्ति आसानी से समझ सकता है कि आखिर जब से व्यक्ति की मृत्यु होती है। तब से पंडित कहते हैं कि इनके पिंड भरवाए जाएं। इनसे उसकी आत्मा स्वर्गवासी होगी और उसके बाद 12वीं, 13वीं के समय अलग-अलग क्रिया कर्म कराने के पाखंड करे जाते हैं। और कहा जाता है कि इसकी आत्मा को शांति मिली या फिर उसको स्वर्ग की प्राप्ति हुई। तो फिर उसके बाद किया जाने वाला यह श्राद्ध क्रिया कर्म हर साल क्यों किया जाता है...!!
इसका क्या औचित्य है....!!
और जैसा कि हम जानते हैं कि गीता जी में लिखा है कि शास्त्र अनुकूल साधना करने से पूर्ण मोक्ष मिलता है। अगर पंडितों के द्वारा बताई गई साधना ही शास्त्र अनुसार होती तो हमें श्राद्ध निकालने की जरूरत ही नहीं होती। क्योंकि यदि हमने जीवन भर शास्त्र अनुकूल साधना करी है। तो हमारा मोक्ष स्वत ही हो जाता है। फिर हम भूत ,पित्र नहीं बनते.....!!
अब हमें हमारे मनुष्य जीवन के मूल उद्देश्य को जानना अति आवश्यक है। और वह है शास्त्र अनुकूल भक्ति करना जिससे हमारा पूर्ण मोक्ष स्वत: ही हो। इसके लिए हमें किसी भी क्रिया कर्म की आवश्यकता नहीं है। और यह जो श्राद्ध निकालने की क्रिया है। यह पूर्णतया व्यर्थ है...!
इसका हमारे मोक्ष से कोई लेना-देना नहीं है।
श्राद्ध निकालना शास्त्र विरुद्ध साधना है..!! इसके शास्त्रों में और अधिक प्रमाण के लिए, मार्कंडेय पुराण में प्रमाण के लिए अवश्य देखें यह वीडियो देखने के लिए यहां क्लिक करें👇👇
मनुष्य जीवन का मूल उद्देश्य भक्ति करना है तथा शास्त्रानुसार सद्भक्ति के लिए अवश्य देखिए साधना टीवी शाम 7:30 से 8:30 तक।
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